स्टॉक
मोबाइल शॉप का रिकॉर्ड: IMEI नंबर, वारंटी और रिपेयर, पर्चियों के ढेर के बिना
छोटी मोबाइल फ़ोन और इलेक्ट्रॉनिक्स दुकान के लिए रिकॉर्ड रखने का व्यावहारिक तरीक़ा: माल आने पर और बिकने पर IMEI और सीरियल नंबर लिखना, वारंटी का दावा एक मिनट में जाँचना, और रिपेयर को काउंटर से वापसी तक संभालना।
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एक ग्राहक आपके काउंटर पर फ़ोन रखता है और कहता है, "यह आपने चार महीने पहले मुझे बेचा था। चार्जिंग पोर्ट ख़राब हो गया है। इसकी वारंटी है।" चेहरा शायद याद हो, फ़ोन याद नहीं। आपका हेल्पर बिलों की कॉपियों वाला जूतों का डिब्बा खंगालने लगता है, ग्राहक की आवाज़ ऊँची होती जाती है और दो और लोग इंतज़ार में खड़े हैं।
हो सकता है पर्ची मिल जाए, हो सकता है आप झगड़ा ख़त्म करने के लिए मान जाएँ, या मना कर दें और एक सच्चा ग्राहक खो दें। तीनों की जड़ एक ही कमी है: किसी ने लिखा ही नहीं कि कौन-सा फ़ोन किसके पास गया।
मोबाइल शॉप किराने की दुकान जैसी नहीं होती। एक ही मॉडल के दो डिब्बे देखने में एक जैसे हैं पर एक चीज़ नहीं। हर एक का अपना IMEI या सीरियल नंबर है, अपनी वारंटी की तारीख़ है और कभी-कभी रिपेयर की अपनी कहानी भी। जब आप यह नंबर दो मौक़ों पर लिख लें, माल आने पर और बिकने पर, तो वारंटी के ज़्यादातर झगड़े एक मिनट में ख़त्म हो जाते हैं।
यह लेख यही तरीक़ा तैयार करता है, काग़ज़ पर भी और फ़ोन ऐप में भी।
हर फ़ोन का एक नंबर क्यों ज़रूरी है
ज़्यादातर दुकानों में स्टॉक चीज़ के हिसाब से गिना जाता है: एक ही बिस्कुट के बारह पैकेट बस बारह हैं। मोबाइल शॉप में यह काफ़ी नहीं, तीन वजहों से।
- वारंटी एक यूनिट की होती है। ग्राहक "उस मॉडल के किसी फ़ोन" पर दावा नहीं कर रहा। वह इसी फ़ोन पर दावा कर रहा है जो एक ख़ास तारीख़ को बिका।
- हर यूनिट की क़ीमत ज़्यादा है। एक गुम हुआ हैंडसेट बहुत-सी एक्सेसरीज़ की बिक्री का मुनाफ़ा खा सकता है। आपको ठीक-ठीक पता होना चाहिए कि कौन-सा ग़ायब है, सिर्फ़ यह नहीं कि गिनती एक कम है।
- फ़ोन वापस आते हैं। बदलने के लिए, रिपेयर के लिए, वारंटी के लिए, कभी दोबारा बेचने के लिए। हर बार आपको पता होना चाहिए कि क्या यह सचमुच वही यूनिट है जो आपने बेचा था।
IMEI एक नंबर है जो डिब्बे पर, फ़ोन के अंदर किसी स्टिकर पर या कुछ मॉडलों में बैटरी के नीचे लिखा होता है, और आम तौर पर *#06# डायल करने पर स्क्रीन पर आ जाता है। दो सिम वाले फ़ोन के अक्सर दो IMEI होते हैं। लैपटॉप, टैबलेट, स्पीकर, महँगे पावर बैंक और ज़्यादातर दूसरे इलेक्ट्रॉनिक सामान पर इसकी जगह सीरियल नंबर होता है। रिकॉर्ड के लिए दोनों को एक ही तरह मानें: एक यूनिट, एक नंबर।
फ़ोन रजिस्ट्रेशन और IMEI जाँच के नियम हर देश में अलग हैं, इसलिए देख लें कि जहाँ आप कारोबार करते हैं वहाँ क्या लागू होता है। यह लेख सिर्फ़ आपकी दुकान का अपना रिकॉर्ड सही रखने के बारे में है।
माल आने पर नंबर लिखें
सीरियल नंबर लिखने का सबसे अच्छा समय वह है जब डिब्बा अभी शेल्फ़ पर नहीं गया। काउंटर पर, ग्राहक के सामने, आप यह काम छोड़ देंगे।
जब माल आए:
- हर डिब्बे को सप्लायर के बिल से मिलाएँ। मॉडल, रंग, मेमोरी और संख्या।
- हर IMEI या सीरियल नंबर लिखें, ख़रीद की उसी लाइन के साथ। दो IMEI वाले फ़ोन की पहचान के लिए पहला काफ़ी है, पर दोनों लिखने से बाद की उलझन बचती है।
- सप्लायर का नाम और तारीख़ उसी लाइन पर लिखें। अगर कोई यूनिट ख़राब निकले तो सप्लायर जानना चाहेगा कि वह उन्हीं का था, और कब आया था।
- डिब्बे पर एक छोटा स्टिकर लगाएँ जिस पर आपका अपना छोटा कोड या IMEI के आख़िरी चार अंक हों। इससे कुछ खोले बिना शेल्फ़ जाँचना आसान हो जाता है।
अगर सप्लायर के बिल पर पहले से IMEI लिखे हों तो वह बिल ख़रीद के साथ संभालकर रखें। यह इस बात का सबूत है कि फ़ोन कहाँ से आया। ख़रीद का बाक़ी तरीक़ा अच्छी ख़रीद और ख़रीद का रिकॉर्ड में है।
डिब्बे का बारकोड आम तौर पर मॉडल की पहचान करता है, अकेले यूनिट की नहीं। अगर आप हर यूनिट का स्कैन होने वाला लेबल चाहते हैं तो मुफ़्त बारकोड लेबल मेकर आपके अपने कोड के साथ लेबल छाप सकता है।
बिकने पर दोबारा लिखें
वारंटी के दावे यही रिकॉर्ड निपटाता है। बिक्री के समय बिल के साथ तीन चीज़ें ज़रूर लिखी जाएँ:
- उस यूनिट का IMEI या सीरियल नंबर जो दुकान से गया।
- ग्राहक का नाम और फ़ोन नंबर। चार महीने बाद सिर्फ़ नाम काफ़ी नहीं होता।
- वारंटी की अवधि जो आप दे रहे हैं, महीनों में, और उसमें क्या शामिल है।
फिर IMEI ग्राहक के बिल पर भी लिखें। जिस बिल पर लिखा हो "फ़ोन, 30,000 रुपये" वह बहुत कम साबित करता है। जिस बिल पर मॉडल और IMEI लिखा हो वह ठीक-ठीक बताता है कि क्या बिका। बिल की बाक़ी बातें अच्छी रसीद पर क्या होना चाहिए में हैं।
ग्राहक के जाने से पहले बिल का नंबर उस डिब्बे से मिला लें जो उसके हाथ में है। डिब्बों का बदल जाना बाद की उलझन की सबसे आम वजह है: ग्राहक ने डिब्बा शेल्फ़ से उठाया और आपने नंबर काउंटर पर रखे किसी और डिब्बे से लिख लिया।
बिक्री से पहले वारंटी की शर्तें साफ़ कर दें
वारंटी का झगड़ा अक्सर फ़ोन का होता ही नहीं। वह इस बात का होता है कि हर पक्ष ने क्या वादा समझा था। यह बात काउंटर पर ही तय कर लें।
अपनी दुकान की शर्तें एक बार तय करें और उन्हें एक कार्ड पर और बिल पर लिखें:
| सवाल | तय करें और लिखें |
|---|---|
| कितनी अवधि? | महीनों की संख्या, बिल की तारीख़ से |
| किसकी वारंटी? | कंपनी की, इम्पोर्टर की, या आपकी दुकान की अपनी |
| क्या शामिल है? | आम इस्तेमाल में आने वाली ख़राबियाँ, जैसे चार्जिंग, बटन, स्पीकर |
| क्या शामिल नहीं? | पानी, टूटी स्क्रीन, खोले जाने के निशान, गिरने से नुक़सान |
| दावे पर क्या होगा? | रिपेयर, बदलना, या कंपनी के सर्विस सेंटर भेजना |
| ग्राहक क्या लाए? | बिल, डिब्बा, या सिर्फ़ फ़ोन |
अगर वारंटी कंपनी की है, आपकी नहीं, तो साफ़ बताएँ, और ग्राहक को बताएँ कि दावा आपके पास आएगा या सर्विस सेंटर जाएगा।
पुराने फ़ोनों की अपनी लाइन होनी चाहिए। अगर आप सेकंड-हैंड यूनिट बेचते हैं तो तय करें कि उन पर दुकान की कोई वारंटी है या नहीं, कितने दिन की, और बिल पर "पुराना" लिखें। पुराने फ़ोन के लिए जाँचकर लौटाने की छोटी-सी मोहलत ठीक है। झगड़े इस बारे में चुप्पी से पैदा होते हैं।
वारंटी का दावा एक मिनट में जाँचना
जब ग्राहक वापस आए तो हर बार यही क़दम उठाएँ, चाहे आप उसे अच्छी तरह जानते हों।
- IMEI ख़ुद फ़ोन से पढ़ें,
*#06#डायल करके या स्टिकर से। ग्राहक जो डिब्बा लाया है उस पर भरोसा न करें। - बिक्री खोजें, उसी नंबर से, ग्राहक के फ़ोन नंबर या नाम से, या उस बिल से जो वह लाया है।
- तारीख़ देखें और उस बिक्री पर दी गई वारंटी की अवधि से मिलाएँ।
- फ़ोन में वे चीज़ें देखें जो शर्तों से बाहर हैं: पानी के निशान, टूटी स्क्रीन, ग़ायब पेच।
- दावा लिखें उसी बिक्री के साथ: किस तारीख़ को आया, ख़राबी ग्राहक के अपने शब्दों में, और आपने क्या फ़ैसला किया।
अगर नंबर किसी बिक्री से नहीं मिलता तो या फ़ोन आपकी दुकान से नहीं बिका, या रिकॉर्ड के बिना बिका। नरमी से बताएँ कि आपको बिक्री नहीं मिल रही। अगर ग्राहक के पास आपका बिल है जिस पर कोई और नंबर है तो जवाब देने से पहले ध्यान से देखें। बदला हुआ डिब्बा इसी तरह सामने आता है।
फ़ोन पर लिखा IMEI ही वह अकेला सबूत है जो बदला नहीं जा सकता। उसे फ़ोन से पढ़ें, डिब्बे या बिल से नहीं।
जब आप मान लें कि फ़ोन बदला जाएगा या वापस लिया जाएगा तो पैसों का हिस्सा वापसी और बदली में है।
रिपेयर को काउंटर से वापसी तक संभालना
बहुत-सी मोबाइल शॉप रिपेयर भी करती हैं, या रिपेयर लेकर टेक्नीशियन को भेजती हैं। फ़ोन सबसे ज़्यादा रिपेयर में गुम होते हैं, क्योंकि वे आपका स्टॉक नहीं होते और उन्हें कोई नहीं गिनता।
हर रिपेयर को नंबर वाली दो हिस्सों की पर्ची दें। एक हिस्सा ग्राहक रखे। दूसरा हिस्सा फ़ोन के साथ जाए, किसी छोटी थैली में या रबर बैंड से बंधा। दोनों हिस्सों पर लिखें:
- रिपेयर का नंबर और आने की तारीख़।
- ग्राहक का नाम और फ़ोन नंबर।
- मॉडल, IMEI और रंग।
- ख़राबी, ग्राहक के अपने शब्दों में।
- फ़ोन के साथ क्या आया: कवर, सिम, मेमोरी कार्ड, चार्जर। अगर कुछ नहीं आया तो "कुछ नहीं" लिखें।
- हालत: खरोंचें, टूटा हुआ बैक, जो कुछ पहले से ख़राब हो।
- बताई गई क़ीमत, और जो रक़म पहले ली गई।
फिर रिपेयर का एक पन्ना रखें, हर रिपेयर की एक लाइन, और हर चरण का एक ख़ाना: आया, टेक्नीशियन को गया, वापस आया, ग्राहक को बताया, ले गया। पन्ने पर एक नज़र डालने से पता चल जाता है कि कौन-से फ़ोन बहुत देर से पड़े हैं। जो फ़ोन कई दिन से "वापस आया" हो और "ग्राहक को बताया" ख़ाली हो, वह कॉल आज ही करनी है।
जब ग्राहक फ़ोन लेने आए तो अपनी पर्ची का हिस्सा दिखाए। फ़ोन का IMEI पर्ची से मिलाएँ, रक़म लें, और लाइन पर "ले गया" लिखें। पर्ची के बिना फ़ोन सिर्फ़ तब दें जब आप ग्राहक की पहचान जाँच लें और यह लिख लें कि जाँच की थी।
एक्सेसरीज़ को सादा रखें
चार्जर, केबल, कवर, स्क्रीन गार्ड और ईयरफ़ोन को सीरियल नंबर की ज़रूरत नहीं। इन्हें बाक़ी स्टॉक की तरह गिनें। असल बात यह है कि इनकी क़ीमत और गिनती सही रहे, क्योंकि रोज़ का ज़्यादातर मुनाफ़ा अक्सर इन्हीं से आता है।
दो आदतें मदद करती हैं:
- बंडल को अलग-अलग लाइनों में बेचें। अगर फ़ोन के साथ कवर मुफ़्त है तो कवर को अपनी अलग लाइन में शून्य क़ीमत या छूट के साथ दर्ज करें, ताकि कवर का स्टॉक भी घटे।
- खुली एक्सेसरीज़ को डिब्बे वाले फ़ोनों से दूर रखें। "चेक करने" के लिए फ़ोन के डिब्बे से निकाला गया चार्जर जो वापस न रखा जाए, एक बिकने लायक़ फ़ोन को अधूरा बना देता है।
हफ़्ते की जाँच जो दस मिनट लेती है
हफ़्ते में एक बार, दुकान खोलने से पहले, शेल्फ़ को रिकॉर्ड से मिलाएँ।
- डिब्बे वाले फ़ोन और दूसरे उपकरण गिनें और हर एक के आख़िरी चार अंक पढ़ें।
- स्टॉक में मौजूद यूनिटों की सूची से मिलाएँ, यानी वे नंबर जो आए और अभी बिके नहीं।
- जो नंबर सूची में है पर शेल्फ़ पर नहीं वह या रिकॉर्ड के बिना बिक गया, या डिस्प्ले के लिए निकाला गया, या ग़ायब है। आज ही पता करें कि कौन-सी बात है।
- रिपेयर का पन्ना देखें कि कौन-से फ़ोन बहुत देर से इंतज़ार में हैं।
- हफ़्ते के वारंटी दावे देखें। एक ही मॉडल का एक ही ख़राबी के साथ बार-बार आना सप्लायर से बात करने की चीज़ है।
पूरी दुकान की पूरी गिनती की योजना एक शाम में स्टॉक की गिनती में बताई गई है।
दुकानदारों के सवाल
क्या सस्ते फ़ोनों का IMEI भी लिखना सचमुच ज़रूरी है?
हाँ, अगर आप उन पर कोई वारंटी देते हैं या वापसी लेते हैं। सस्ते फ़ोन पर भी दावा उतना ही मुमकिन है, और नंबर के बिना उसे जाँचना उतना ही मुश्किल। पंद्रह अंक लिखने में कुछ सेकंड लगते हैं और जिस दिन ज़रूरत पड़े उस दिन लंबी बहस बच जाती है।
अगर ग्राहक का बिल खो गया हो तो?
अगर आपने बिक्री के समय IMEI और ग्राहक का फ़ोन नंबर लिखा था तो बिल के बिना भी बिक्री मिल जाएगी। नंबर फ़ोन से पढ़ें और खोजें। बिक्री को नंबर और ग्राहक के साथ दर्ज करने की सबसे बड़ी वजह यही है, बजाय उस काग़ज़ पर भरोसा करने के जो ग्राहक को संभालकर रखना हो।
क्या कंपनी की वारंटी के साथ अपनी दुकान की वारंटी भी दूँ?
यह आपका फ़ैसला है, और इससे बिक्री बढ़ सकती है। पर इसे छोटा और साफ़ रखें, जैसे अगर ख़राबी तुरंत दिखे तो बदलने के लिए कुछ दिन, और बिल पर लिख दें। ऐसी दुकान की वारंटी जो आप निभा न सकें, कोई वारंटी न होने से ज़्यादा नुक़सान करती है।
अगर कोई ग्राहक अपना फ़ोन मुझे बेचना चाहे तो क्या करूँ?
इसे सप्लायर से ख़रीद की तरह मानें। IMEI, बेचने वाले का नाम और फ़ोन नंबर, तारीख़ और दी गई क़ीमत लिखें, और जहाँ आप कारोबार करते हैं वहाँ चलन हो तो उसके पहचान पत्र की कॉपी रखें। जहाँ ऐसी जाँच मौजूद हो वहाँ देखें कि फ़ोन खोया हुआ या चोरी का रिपोर्ट तो नहीं हुआ। ऐसा फ़ोन न ख़रीदें जिसके IMEI से छेड़छाड़ की गई हो।
महीनों से न ली गई रिपेयर का क्या करूँ?
फ़ोन आते ही अपना नियम रिपेयर की पर्ची पर लिख दें, जैसे ग्राहक को बताने के बाद एक तय समय में न लिए गए फ़ोन के साथ वही किया जाएगा जिसकी स्थानीय चलन इजाज़त देता हो। ग्राहक को कम से कम दो बार फ़ोन करें और तारीख़ें लिखें। कारोबार के पास छोड़े गए सामान के नियम अलग-अलग हैं, इसलिए कुछ बेचने या हटाने से पहले देख लें कि जहाँ आप कारोबार करते हैं वहाँ क्या लागू होता है।
Saleva इसका बिक्री वाला हिस्सा आपके लिए संभाल सकता है। Settings में मोबाइल शॉप और इलेक्ट्रॉनिक्स का मॉड्यूल चालू हो तो प्रोडक्ट फ़ॉर्म सीरियल नंबर और वारंटी के महीने पूछता है, और ये बिक्री के साथ दर्ज होते हैं, इसलिए वारंटी का दावा Sales history में बिल से जाँचा जा सकता है, जहाँ आप इनवॉइस नंबर या ग्राहक के नाम से खोज सकते हैं। मॉड्यूल कहाँ चालू करना है यह प्रोडक्ट और स्टॉक गाइड में दिखाया गया है।
यह सब Saleva में
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